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6000 वर्गफीट के दो भूखंडों का मामला, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल; अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
मुंगेली/ भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी नगर पालिका अब फिर नए विवाद में घिरी हैं। नगर पालिका परिषद मुंगेली की भवन निर्माण अनुमति और अवैध निर्माण पर कार्रवाई की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दो अलग-अलग भूखंडों पर 3000-3000 वर्गफीट भूमि के लिए जारी भवन निर्माण अनुज्ञाएं निरस्त किए जाने के बावजूद निर्माण जारी रहने के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर आज उप मुख्यमंत्री अरुण साव से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की जाएगी।
मिली जानकारी के अनुसार, भवन निर्माण अनुज्ञा क्रमांक 2026-25-000029 और 2026-25-000030 दोनों 17 मार्च 2026 को जारी की गई थीं। इसके बाद जून 2026 में इन्हें निरस्त करने की सूचना जारी हुई। पहली अनुज्ञा के लिए सूचना क्रमांक 930 तथा दूसरी के लिए 931 का उल्लेख है। निरस्तीकरण के पीछे अनुमति की शर्त क्रमांक 1 और 11 के उल्लंघन का हवाला दिया गया है।
पहले अनुमति कैसे मिली, बाद में निरस्त क्यों हुई?
जब भवन निर्माण की अनुमति जारी की गई थी, तब भूमि के दस्तावेजों और निर्माण संबंधी शर्तों की जांच किस आधार पर हुई? यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली? नगर पालिका प्रशासन को अनुमति जारी करने से लेकर निरस्तीकरण तक की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए।
निरस्तीकरण के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि अनुमति निरस्त होने के बावजूद संबंधित स्थलों पर निर्माण कार्य जारी है। यदि ऐसा है तो नगर पालिका ने मौके पर निरीक्षण, निर्माण रोकने और नियमानुसार कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए? सीएमओ, इंजीनियर और राजस्व अमले की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आज उप मुख्यमंत्री से शिकायत
शिकायत में भवन अनुज्ञा निरस्तीकरण, कथित अवैध निर्माण और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की जाएगी। नागरिकों ने कलेक्टर से भी मामले का संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई है। अब देखना होगा कि प्रशासन निर्माण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाता है।


