2025 में कथित बाहरी शराब बिक्री के मामले में हटाए जाने की चर्चा, अब उसी दुकान में फिर मिली जिम्मेदारी
रायपुर/खरोरा। खरोरा स्थित देसी शराब दुकान एक बार फिर चर्चाओं में है। दुकान में कथित रूप से निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने यानी ओवररेटिंग की शिकायतों के बीच सुपरवाइजर तिलक साहू को पुनः उसी दुकान में पदस्थ किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस कर्मचारी को पूर्व में गंभीर आरोपों और विवादों के बाद पद से हटाए जाने की कार्रवाई हुई थी, उसे दोबारा उसी दुकान की जिम्मेदारी सौंपना विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
2025 के कथित बाहरी शराब बिक्री मामले का फिर उठा मुद्दा
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में खरोरा देसी शराब दुकान में कथित रूप से बाहरी शराब लाकर अवैध बिक्री किए जाने का मामला सामने आया था। मामले की सूचना मिलने के बाद तत्कालीन वरिष्ठ आबकारी अधिकारी DC राजेश शर्मा द्वारा कार्रवाई करते हुए संबंधित सुपरवाइजर को पद से हटाए जाने की बात सामने आई थी।
उस समय पूरे मामले में कुछ विभागीय अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे। हालांकि, इन आरोपों की विधिवत और निष्पक्ष जांच हुई या नहीं तथा उसका अंतिम निष्कर्ष क्या रहा, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ सकी है।
अब उसी व्यक्ति तिलक साहू को पुनः खरोरा देसी शराब दुकान में सुपरवाइजर बनाए जाने से स्थानीय नागरिकों में असंतोष और चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अब ओवररेटिंग की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता
खरोरा शराब दुकान को लेकर अब ग्राहकों द्वारा कथित रूप से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ शराब ब्रांडों पर तय कीमत से अधिक पैसे लिए जा रहे हैं।
यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है तो सवाल उठता है कि शराब दुकान में निर्धारित दरों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? स्थानीय लोगों ने दुकान की बिक्री दर, बिलिंग व्यवस्था और मौके पर वसूली जा रही राशि की जांच कराने की मांग की है।
एक ही दुकान में फिर से पदस्थापना क्यों?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी को पूर्व में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद हटाया गया था, तो उसी व्यक्ति को दोबारा उसी दुकान में पदस्थ करने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया?
– क्या वर्ष 2025 के पूरे मामले की जांच पूरी हो चुकी है?
– यदि जांच हुई थी तो उसकी रिपोर्ट और निष्कर्ष क्या हैं?
– पुनः पदस्थापना से पहले संबंधित कर्मचारी को क्लीन चिट दी गई थी या नहीं?
– पूरे जिले या प्रदेश में अन्य योग्य और स्वच्छ छवि वाले सुपरवाइजर उपलब्ध नहीं थे?
– वर्तमान में सामने आ रही कथित ओवररेटिंग की शिकायतों की जांच कब होगी?
त्योहारों और बढ़ती बिक्री के बीच प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल
होली जैसे बड़े पर्वों के दौरान शराब की बिक्री और मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे समय में शराब दुकानों की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने विवादों से जुड़े कर्मचारी को उसी स्थान पर दोबारा जिम्मेदारी देना प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े करता है।
प्रदेश सरकार लगातार कानून व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के दावे करती रही है। ऐसे में आबकारी विभाग से जुड़ी शिकायतों और कथित अनियमितताओं पर त्वरित एवं पारदर्शी कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।
जांच और स्थिति स्पष्ट करने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने आबकारी विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि खरोरा देसी शराब दुकान में सामने आ रही कथित ओवररेटिंग की शिकायतों की तत्काल जांच कराई जाए। साथ ही वर्ष 2025 में सामने आए कथित बाहरी शराब बिक्री मामले और संबंधित कर्मचारी की पुनः पदस्थापना के आधारों को भी स्पष्ट किया जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या आबकारी विभाग इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखेगा?

