स्वतंत्र तिवारी – 9752023023
मुंगेली – शहर में खान-पान की वस्तुओं को लेकर होटल और ठेला संचालकों की लापरवाही और मनमानी चरम पर है। शिकायत के बाद कलेक्टर द्वारा खाद्य सामग्री को अखबारों में लपेटकर देने या पैक करने पर सख्त पाबंदी लगाए जाने के बावजूद, शहर के अधिकांश इलाकों में इस आदेश की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। मुनाफे के चक्कर में होटल संचालक आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
क्यों खतरनाक है अखबार में खाना?
विशेषज्ञों के अनुसार, अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में खतरनाक रसायन और लेड (सीसा) जैसे भारी तत्व होते हैं। जब गर्म खाद्य सामग्री (जैसे समोसे, कचोरी, भजिया, जलेबी या पोहा, अन्य) को अखबार पर रखा जाता है, तो यह स्याही पिघलकर भोजन में मिल जाती है। लंबे समय तक ऐसी सामग्री का सेवन करने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। यह स्याही पेट के संक्रमण और पाचन संबंधी गंभीर विकारों का कारण बनती है। बच्चों और बुजुर्गों के मानसिक विकास और गुर्दों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है।
प्रशासन सख्त, पर धरातल पर सुस्ती…
मुंगेली निवासी अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी ने कलेक्टर से शिकायत कर मांग किया था कि खाद्य और मानक विनियम 2018 के अंतर्गत अखबारों में किसी भी ऐसी सामग्री का भंडारण और खाद्य को लपेटने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिये। जिसके बाद कलेक्टर के आदेश पर कार्यवाही और अपील की गई। दिनांक 06/06/2026 को अतिरिक्त कलेक्टर ने मुंगेली के खाद्य सुरक्षा अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा था कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) द्वारा दिनांक 24.12.2018 को भारत के राजपत्र के माध्यम से खाद्य और मानक विनियम 2018 उपबंधित किया गया है, इस विनियम के उपबंध 02 में कहा गया है कि ये राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवत्त होगे और खाद्य कारोबार चालक 01.07.2019 से इन विनियमों के सभी उपबंधो का अनुपालन करना होगा। इय नियम के तहत् अखबार या किसी भी ऐसी सामग्री का भंडारण और खाद्य को लपेटने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिये।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा उपबंधित विनियमों का कड़ाई से पालन करते हुए अखबारों का उपयोग खाद्य पदार्थ पैक करने या खाद्य पदार्थ परोसने प्रतिबंध लगाने के संबंध में निवेदन किया गया है। अतः भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा उपबंधित विनियमों का कड़ाई से पालन किए जाने हेतु पूर्व में आपको निर्देशित किया गया था, जिसके संबंध में आपके द्वारा आज दिनांक तक क्या कार्यवाही किया गया 02 दिवस के भीतर अघोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष स्वंय उपस्थित होकर विस्तृत प्रतिवेदन पेश करें साथ ही साथ आपके द्वारा उक्त संबंध में क्या जागरूकता अभियान चलाया गया है उसके संबंध में प्रतिवेदन सह फोटोग्राफ के माध्यम से अवगत किया जाना सुनिश्चित करने निर्देश दिया गया।
उक्त निर्देश पत्र के बाद खाद्य अधिकारी द्वारा होटलों में निरीक्षण किया गया, विभागीय जानकारी के अनुसार कई होटल संचालकों ने लिखित में प्रशासन को यह आश्वासन तो दे दिया कि उनके द्वारा अखबारों में खाद्य सामग्री नहीं बेची जायेगी परंतु दूसरे दिन फिर से ये लोगों की जान से खेलना नहीं छोड़े, फिर से अखबारों के पन्नो में खाद्य सामग्री बेच रहे हैं और खाद्य विभाग कुम्भकर्णी निंद्रा में हैं।
कलेक्टर के आदेश के बावजूद भी शहर के मुख्य बाजारों से लेकर गलियों तक, स्थिति जस की तस बनी हुई है। अखबार में खाना लपेटना सीधे तौर पर जहर परोसने जैसा है। मुंगेलीवासियों ने कहा कि प्रशासन को केवल कागजी आदेश जारी करने के बजाय, औचक निरीक्षण कर ऐसे लापरवाह संचालकों के लाइसेंस निरस्त करने चाहिए।
खाद्य विभाग की चुप्पी पर सवाल ?
हैरानी की बात यह है कि सरेआम नियमों का उल्लंघन होने के बाद भी खाद्य विभाग की टीम मौन साधे हुए है। इक्का-दुक्का कार्रवाई के बाद विभाग फिर सुस्त पड़ जाता है, जिसका फायदा होटल और ठेला संचालक उठा रहे हैं।
भारत-भास्कर की अपील –
एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर, यदि कोई दुकानदार आपको अखबार में खाना देता है, तो उसे तुरंत टोकें। आपकी सतर्कता ही आपके और आपके परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है।





