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मुंगेली नगर पालिका ने पहले नियम विरुद्ध जारी किया भवन निर्माण अनुज्ञा…शिकायत के बाद अनुज्ञा कैंसिल…लेकिन अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी…नपा के अधिकारियों के संरक्षण में हो रहा अवैध निर्माण…
मुंगेली/ मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण को शह देने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। मामला केवल नियम विरुद्ध अनुज्ञा देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिकायत के बाद अनुज्ञा रद्द (कैंसिल) होने के बावजूद लगभग 6000 वर्गफीट में अवैध निर्माण कार्य बेधड़क और धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय नगर पालिका प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से साफ जाहिर होता है कि इस पूरे खेल को नगर पालिका के ज़िम्मेदार अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है। इंजीनियर कार्यवाही के नाम पर लीपापोती कर रहे हैं और अवैध निर्माण आज भी जारी हैं।
क्या है पूरा मामला…
प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर रोड में एसएनजी कालेज के बगल में ही मुंगेली नगर पालिका द्वारा जीवन मंगलानी सहित दो और लोगों को भवन निर्माण के लिए पहले अनुमति दी गई थी, जबकि यह क्षेत्र अवैध प्लॉटिंग के रूप में दर्ज हैं, जागरूक नागरिकों की शिकायत के बाद नगर पालिका ने अनुमति में नियमों का उल्लंघन पाया, इसके बाद नगर पालिका प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त भवन की निर्माण अनुज्ञा को तत्काल प्रभाव से केंसिल कर दिया, नियमतः अनुज्ञा निरस्त होने के बाद काम को तुरंत रोक दिया जाना चाहिए था और अवैध हिस्से को ढहाया जाना था, लेकिन यहाँ स्थिति बिल्कुल उलट है, अवैध निर्माण रुका तो नहीं बल्कि और तेज गति से होने लगा।
नगर पालिका मुंगेली द्वारा पहले तो समस्त मास्टर प्लान और निर्माण संबंधी कड़े नियमों को दरकिनार करते हुए अवैध प्लाटिंग में भवन निर्माण अनुज्ञा जारी कर दिया गया जब जागरूक नागरिकों और शिकायतकर्ताओं ने इस फर्जीवाड़े की परतें खोलीं तो हड़बड़ी में अधिकारियों को अपनी गर्दन बचाने के लिए अनुज्ञा निरस्त करनी पड़ी।
लेकिन असली तमाशा इसके बाद शुरू हुआ, नियम से तो अनुमति बकागजों पर निरस्त हो गए, लेकिन जमीन पर बुलडोजर चलना तो दूर, मिस्त्री और मजदूर दिन-रात अवैध इमारत को खड़ा करने में जुटे हुए हैं।
अधिकारियों के संरक्षण में ‘अवैध’ बना ‘वैध’ ? क्या कर रहे CMO, इंजीनियर…? JD के आदेश की भी अवहेलना…
सवाल यह उठता है कि जब नगर पालिका ने आधिकारिक तौर पर निर्माण अनुमति रद्द कर दी है, तो फिर किसकी शह पर यह अवैध निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहा ? निर्माण स्थल पर नगर पालिका का कोई भी जिम्मेदार दस्ता काम रुकवाने नहीं पहुँच रहा है, और पहुंचता भी हैं तो औपचारिक मात्र के लिए। सबसे बड़ा सवाल हैं कि अनुमति कैंसिल होने के बाद भी इतने बड़े हिस्से में अवैध निर्माण कैसे हो गया ? इस मामले में नगरीय निकाय के तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर से भी सवाल पूछा गया था तो उन्होंने कार्यवाही का आश्वासन दिया पर ऐसा लगता हैं कि मुंगेली नगर पालिका के अधिकारी जॉइंट डायरेक्टर से बड़े हो गए हैं ?
राज्य सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान…
इस तरह की सांठगांठ से सीधे तौर पर राज्य सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है। अनुज्ञा निरस्त होने के बाद भी काम जारी रहना अधिकारियों की नीयत और कार्यशैली पर सीधे सवालिया निशान खड़े करता है ?
कार्यवाही करने तत्कालीन कलेक्टर कुंदन कुमार रहे नाकाम…नये कलेक्टर अमृत विकास से ‘कड़े एक्शन’ की उम्मीद…
तत्कालीन मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार की कार्यशैली को देखते हुए आम जनता और जागरूक नागरिकों की निगाहें पूरी तरह से ज़िला प्रशासन पर टिकी थी, शहरवासियों को उम्मीद था कि तत्कालीन कलेक्टर कुंदन कुमार इस पूरे मामले का संज्ञान लेंगे और अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से सील या ध्वस्त कराएंगे, साथ ही अवैध प्लाटिंग में नियम विरुद्ध अनुज्ञा देने और फिर काम न रुकवाने वाले नगर पालिका के दोषी अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करेंगे, परंतु ऐसा नहीं हुआ, और देखते ही देखते अवैध निर्माण जारी रहा और कलेक्टर कुंदन कुमार का ट्रांसफर भी हो गया, अब मुंगेली के नए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो हैं ऐसे में अब जनता नए कलेक्टर से इस एसएनजी कालेज के पास हो रहे अवैध निर्माण को रोकने और ध्वस्त करने की कार्यवाही की उम्मीद लगाए बैठी हैं।
अब देखना यह होगा कि मुंगेली नगर पालिका के इस बेलगाम रवैये पर नए कलेक्टर का चाबुक कब चलता है और अवैध निर्माण पर बुलडोजर की कार्रवाई कब देखने को मिलती है ?





