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उपमुख्यमंत्री अरुण साव के ‘विकास मॉडल’ पर पानी फेर रही मुंगेली नगर पालिका…50 लाख की घोषणा, काम ठप, बोर्ड गायब…शैक्षणिक कार्य बुरी तरह प्रभावित…अधिकारियों की मनमानी…भ्रष्टाचार को संरक्षण…? छात्र-छात्राओं में आक्रोश…

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स्वतंत्र तिवारी – 9752023023

रायपुर-मुंगेली/ मुंगेली नगर पालिका में प्रशासनिक लापरवाही और विकास कार्यों में लेट-लतीफी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। एसएनजी कालेज में 50 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत विकास कार्य लंबे समय से ठप पड़ा हुआ है। इतना ही नहीं, मौके से कार्य संबंधी सूचना बोर्ड (साइन बोर्ड) तक गायब है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता, लागत और समय-सीमा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य ठप होने का यह एक पहला काम नहीं हैं, ऐसे कई कार्य हैं जो बंद पड़े हुए हैं। कुछ गिने चुने दिन एसएनजी कालेज में मरम्मत, जीर्णोद्धार होते हैं उसके बाद लंबे समय के लिए कार्य बंद हो जाता हैं।

शैक्षणिक कार्य बुरी तरह प्रभावित….

50 लाख की लागत से एसएनजी कालेज में हो रहा मरम्मत और नवनिर्माण कार्य अधर में लटका हुआ हैं जिसके कारण शैक्षणिक कार्य और अकादमिक कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। नियमित कक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों में भारी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। स्थानीय लोगों और छात्रों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद नगर पालिका के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जहां कार्यालयीन कार्य संपादित होते थे उस कक्ष, हाल को मरम्मत और नवनिर्माण के लिए खाली करा दिया गया हैं, लेकिन खाली होने के कई दिनों बाद भी वहां कार्य शुरू नहीं किया गया, और इस कार्यालय को कक्षा रूम में शिफ्ट कर दिया हैं, जिससे शैक्षणिक कार्य तो प्रभावित है ही, साथ ही कार्यालय के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

डिप्टी सीएम अरुण साव की साख दांव पर…

आपको बता दें कि उप-मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव का गृह जिला मुंगेली हैं और इसी एसएनजी कालेज में उन्होंने शिक्षा ग्रहण की हैं, जिसके चलते उपमुख्यमंत्री अरुण साव की लोकप्रियता मुंगेली जिले में सबसे अधिक हैं परंतु उपमुख्यमंत्री अरुण साव का खुद का विभाग, खुद के गृहजिले में उनकी साख दांव पर लगाने तुला हैं, नगर पालिका के अधिकारियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या नगर पालिका के अधिकारी, जनप्रतिनिधि शासन की प्राथमिकताओं और गुणवत्तापूर्ण कार्य को ठेंगा दिखा रहे हैं ? डिप्टी सीएम अरुण साव ने ही एसएनजी कालेज में मरम्मत और नवनिर्माण के लिए 50 लाख की स्वीकृति दी थी।

अधिकारियों की मनमानी या भ्रष्टाचार को संरक्षण ?

लाखों रुपये के बजट की घोषणा और स्वीकृति के बावजूद काम का ठप पड़ना तथा सूचना बोर्ड का गायब होना कई संदेहों को जन्म देता है। निर्माण स्थल पर स्वीकृत व निर्माण कार्य की पूर्ण जानकारी का विवरण बोर्ड में उल्लेख किया जाना चाहिए, जिससे निर्माण कार्य की पूरी जानकारी आम जनता को हो सके, पर एसएनजी कालेज में 50 लाख की लागत से हो रहे मरम्मत और नवनिर्माण कार्य का बोर्ड न लगना भ्रष्टाचार की ओर इंगित करता हैं। क्या यह नगर पालिका अधिकारियों की प्रशासनिक लाचारी है ? या फिर बजट खपाने और भ्रष्टाचार को ढंकने की सोची-समझी साजिश ? कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड का न होना पारदर्शिता के नियमों का सीधा उल्लंघन है ।

स्थानीय नागरिकों और छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कर शैक्षणिक व्यवधान को दूर नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस मामले पर संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है ?

इस संबंध में जानकारी लेने जब मुंगेली नगर पालिका के इंजीनियर नेमीचंद वर्मा को कॉल किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया…

एसएनजी कालेज के जमीन में हो रहे कब्जे और सीमांकन विवाद और पास में हो रहे अवैध निर्माण….का जल्द ही खुलासा….पढ़ते रहिते दैनिक भारत – भास्कर….