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मुंगेली/ मुंगेली में स्थानीय निकाय चुनाव के बाद से उपजे राजनीतिक भूचाल ने अब एक नया और विवादित मोड़ ले लिया है। अपनी ही पार्टी की पीठ में छुरा घोंपने वाले ‘विभीषणों’ को बेनकाब करने के लिए गठित की गई कांग्रेस की जांच कमेटी खुद सवालों के कटघरे में खड़ी हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि लंबी तफ्तीश और बंद कमरों की बैठकों के बावजूद जांच कमेटी क्रॉस वोटिंग करने वाले गद्दार पार्षदों की पहचान करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
इस ‘सुपर फ्लॉप’ जांच के बाद अब मुंगेली से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन के भीतर भारी असंतोष और गुटबाजी का उबाल देखने को मिल रहा है।
जांच कमेटी पर उठ रहे गंभीर सवाल….राजनीतिक दबाव या लाचारी ? या कुछ और ?
पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा गर्म है कि क्या जांच कमेटी के हाथ किसी रसूखदार नेता या गुट के दबाव में बंधे हुए हैं ? या इन्हें आंतरिक कलह का डर सता रहा ? आशंका जताई जा रही है कि अगर क्रॉस वोटिंग करने वाले पार्षदों के नामों का खुलासा कर दिया गया, तो मुंगेली कांग्रेस में सीधी बगावत फैल जाएगी। क्या इसी डर से मामला ठंडे बस्ते में डाला गया ? या मामला शांत करने कुछ बड़ा खेल हुआ हैं ? या कईयों की जेबें गर्म की गई हैं ?
’क्लीन चिट’ या नाकामी का ढोंग ?
जब नगर निकाय चुनावों में क्रास वोटिंग हुई थी, तब आलाकमान ने कड़ा रुख अपनाते हुए गद्दारों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का दावा किया था। लेकिन जांच कमेटी की रीढ़हीन रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि संगठन में आंतरिक जवाबदेही नाम की कोई चीज नहीं बची है।
पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता अब खुलेआम पूछ रहे हैं कि जब जांच कमेटी किसी नतीजे पर पहुंच ही नहीं सकती थी, तो फिर इस जांच का नौटंकी भरा नाटक क्यों रचा गया ? संगठन की साख दांव पर मुंगेली में क्रास वोटिंग का यह जिन्न अब शांत होने वाला नहीं है। गद्दारों की पहचान न हो पाना मुंगेली कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। एक तरफ जहां भाजपा इस स्थिति का पूरा सियासी फायदा उठाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता हताश और ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
क्या था पूरा मामला…
बीजेपी की गढ़ वाली मुंगेली नगरपालिका में बीजेपी के कद्दावर नेताओं के बीच भी बीजेपी को नपा अध्यक्ष में हार का सामना करना पड़ा। मुंगेली नगर पालिका में कांग्रेस के रोहित शुक्ला ने बीजेपी के शैलेश पाठक को पराजित कर नगर में कांग्रेस की सरकार स्थापित किया था।
नपा के उपाध्यक्ष पद के चुनाव में क्रास वोट से गरमाया था मामला –
नगर पालिका मुंगेली के चुनाव में कांग्रेस के 11, बीजेपी के 10 और 1 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीतकर आए थे। कांग्रेस ने वरिष्ठ पार्षद अरविंद वैष्णव को और भाजपा ने जयप्रकाश मिश्रा को नगर पालिका उपाध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया था। कांग्रेस पार्षदों के बहुमत के बावजूद भी कांग्रेस का उपाध्यक्ष नहीं बनाया जा सका। इस चुनाव में कांग्रेस के पाले में अध्यक्ष सहित 12 मत थे। जबकि, बीजेपी के पास निर्दलीय पार्षद के साथ 11 मत थे। निर्वाचित नपा अध्यक्ष और 22 वार्ड के पार्षद ने अपने मतों का प्रयोग किया। जिसमें बीजेपी के पक्ष में 13, कांग्रेस के पक्ष में 9 तो 1 मत रिजेक्ट होकर बीजेपी पार्षद जयप्रकाश मिश्रा नगरपालिका में उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए। इस परिणाम ने यह सिद्ध कर दिया था कि कांग्रेस में चालाकी और धोखेबाजी करने वालों की कमी नहीं हैं क्योंकि कुछ 12 मत होने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार को 9 मत मिलना यह अपने आप में बड़ा उदाहरण था। परिणाम आने के बाद कांग्रेस में क्रोस वोट करने वालों की पहचान के लिए टीम बनाई गई थी, जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा दिनांक 24/03/2025 को तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया था, परंतु जांच टीम ने ऐसी जांच की कि केवल एक कांग्रेसी पार्षद विनय चोपड़ा को क्रॉस वोटिंग करने का दोषी पाते हुए कांग्रेस पार्टी से निकाला गया, जबकि पार्टी के बाकी धोखेबाजों के विषय में अभी तक कोई जांच या कार्यवाही नही की गई, अब इसमें क्या अड़चन आ रही है यह तो कांग्रेस कमेटी या जांच कमेटी ही जाने ? कांग्रेस कार्यकर्ताओं में यह चर्चा हैं कि भाजपा को सपोर्ट करने वाले कांग्रेसी पार्षदों पर कार्यवाही न करने सत्तापक्ष के नेताओं का दबाव हैं ? डर हैं ? या कोई और बात ? यह समझ से बाहर हैं ? उनका कहना हैं कि कांग्रेस के खिलाफ काम करने वाले धोखेबाजों को जल्द ही पार्टी से निलंबित करना चाहिए। कार्यवाही न होने से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में बहुत ही आक्रोश देखा गया। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कहा कि जांच टीम को जल्द ही बाकी धोखेबाजों को पार्टी से निष्कासित किया जाना चाहिए, कार्यवाही न होने पर जांच कमेटी पर उंगलियां उठ रही हैं।
पार्षद विनय चोपड़ा का निष्कासन हुआ रद्द….
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति की बैठक बीते 18 सितंबर को संपन्न हुई,जिसमें कांग्रेस की विचारधारा के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए विभिन्न कारणों से कांग्रेस से निष्कासित किए गए कार्यकर्ताओं के निष्कासन को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी किया गया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गेंदू के हस्ताक्षर से जारी सूची में मुंगेली नगर पालिका के पार्षद विनय चोपड़ा का नाम भी शामिल है। इस आदेश के साथ ही विनय चोपड़ा की कांग्रेस में पुनः वापसी हो गई है।
विनय चोपड़ा लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे हैं और पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में उनकी पहचान रही है। नगर की स्थानीय राजनीति में भी वे लगातार सक्रिय रहे हैं। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने विभिन्न जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। वहीं सत्तापक्ष की नीतियों एवं कार्यप्रणाली को लेकर भी वे मुखर होकर अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। कांग्रेस में उनके निष्कासन के बाद अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा निष्कासन रद्द किए जाने से उनके समर्थकों एवं शुभचिंतकों में उत्साह का माहौल हैं।




