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कलेक्टर जनदर्शन में आये अधिकारी ही उड़ा रहे कानून की धज्जियाँ…गलत पार्किंग से यातायात बाधित…आम आदमी के लिये नियम…साहबों को छूट…

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स्वतंत्र तिवारी – 9752023023

मुंगेली/ ​आम आदमी अगर सड़क पर दो मिनट के लिए भी अपनी गाड़ी गलत जगह खड़ी कर दे, तो यातायात पुलिस की कार्यवाही और चालान का शिकंजा तुरंत कस जाता हैं लेकिन जब यही नियम जिला प्रशासन के आला अधिकारियों पर लागू होने की बात आए, तो कानून की धज्जियाँ उड़ने में वक्त नहीं लगता। ऐसा ही एक विरोधाभासी और व्यवस्था को मुंह चिढ़ाता नजारा साप्ताहिक कलेक्टर जनदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास देखने को मिल रहा है, जहाँ अपनी फरियाद लेकर आने वाली आम जनता, अधिकारियों के बेतरतीब वाहन पार्किंग से होने वाले अव्यवस्थाओं से जूझने को मजबूर है।

​कलेक्टर सुन रहे जनदर्शन में समस्या, बाहर अधिकारी खुद खड़ी कर रहे मुसीबत…

​हर हफ्ते आयोजित होने वाले कलेक्टर जनदर्शन का मकसद आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है। दूर-दराज के गांवों से गरीब, बुजुर्ग और लाचार लोग अपनी शिकायतें लेकर यहाँ पहुँचते हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि जिन अधिकारियों को जनता की समस्याएं सुलझाने के लिए बुलाया जाता है, उनकी गाड़ियाँ ही कलेक्ट्रेट के मुख्य मार्ग और नो-पार्किंग जोन में बेतरतीब ढंग से खड़ी रहती हैं ​अधिकारियों की इन गाड़ियों की गलत पार्किंग के कारण पूरा यातायात बाधित हो जाता है। फरियादियों को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है, जिससे कई बार दुर्घटना की स्थिति निर्मित हो जाती है।

​आम आदमी के लिए नियम, अधिकारियों को खुली छूट…

​कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद जागरूक नागरिकों और फरियादियों ने इस दोहरी व्यवस्था पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है लोगों का कहना है कि यदि कोई गरीब या मध्यमवर्गीय व्यक्ति अपनी बाइक या गाड़ी थोड़ी भी इधर-उधर खड़ी कर दे, तो उसे ‘यातायात व्यवस्था में बाधा’ बताकर तुरंत फाइन ठोक दिया जाता है लेकिन यह नियम कानून, ​साहबों के लिए लागू नहीं होता, छत्तीसगढ़ शासन लिखी वीआईपी वाली गाड़ियां घंटों तक बीच रास्ते में खड़ी रहती हैं, लेकिन जिम्मेदार यातायात अमला इन गाड़ियों की तरफ देखने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाता। नागरिकों का कहना हैं कि जो अधिकारी खुद कानून का पालन नहीं कर सकते, वे जनता को न्याय क्या दिलाएंगे?”
​जनदर्शन जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दिन इस तरह की अव्यवस्था जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
​जब कलेक्ट्रेट परिसर में पार्किंग की जगह निर्धारित है, तो अधिकारी अपनी गाड़ियां मुख्य रास्तों पर क्यों पार्क कर रहे हैं ? क्या इन पर कार्यवाही होगी या यूं ही जनदर्शन में यातायात अव्यवस्था बनी रहेगी।