स्वतंत्र तिवारी – 9752023023
मुंगेली/ सोशल मीडिया में इन दिनों मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र के विकास की ऐसी ‘चमकदार’ तस्वीरें तैर रही हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि शहर रातों-रात पेरिस बनने जा रहा है। चमचमाती सड़कें, आलीशान सामुदायिक भवन, नगर पालिका भवन और आधुनिक नालियों के ग्राफिक्स दिखाकर जनता की वाहवाही लूटने का दौर जारी है। लेकिन जब हमारी टीम ने इन दावों की ‘जमीनी हकीकत’ टटोली, तो विकास की इस चमकीली परत के नीचे भ्रष्टाचार की एक ऐसी बदबूदार तस्वीर सामने आई, जिसने व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।
नगर पालिका क्षेत्र में वर्तमान में चल रहे करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली और घटिया निर्माण की शिकायतें आ रही हैं। हालत यह है कि करोड़ों के प्रोजेक्ट्स ठेकेदारों और रसूखदारों के लिए ‘कमाई का जरिया’ बन कर रह गए हैं।
कागजों पर ‘ए-ग्रेड’, जमीन पर भ्रष्टाचार का खेल…
स्थानीय नागरिकों और पार्षदों के मुताबिक, शहर में जहां भी सीसी रोड, नाली निर्माण या सौंदर्यीकरण सहित अन्य जो काम चल रहा है, वहां तय मापदंडों को ताक पर रख दिया गया है। सड़कों, नालियों, प्रवेश द्वार, गौरव पथ, पाथवे सहित बहुत से निर्माण में अनियमितता बरती जा रही है, कई निर्माण में लापरवाही को लेकर नोटिस भी जारी हुई हैं। कई वार्डों में कुछ दिनों पहले बने सड़कें और नालियां अभी से दरकने लगी हैं और नई सड़कों की गिट्टियां बाहर आने लगी हैं जिससे भ्रष्टाचार स्पष्ट दिखाई दे रहा लेकिन जिम्मेदार लोगों के मुँह में ताले लगे हुये हैं इससे लगता हैं कि ये कहीं न कहीं कमीशनखोरी में लिप्त हैं।
सूचना पटल गायब..
नियमतः हर निर्माण कार्य के पास एक बोर्ड होना चाहिए, जिसमें बजट, ठेकेदार का नाम और काम की समय-सीमा सहित सारी जानकारी लिखी होनी चाहिए लेकिन मुंगेली के अधिकांश निर्माण स्थलों से यह ‘सूचना पटल’ गायब है ताकि जनता को सच का पता ही न चले।
कमीशनखोरी का ‘क्रोनोलॉजी’ और अधिकारियों की चुप्पी…
स्थानीय नागरिकों का कहना हैं कि इस पूरे खेल के पीछे कमीशनखोरी का बड़ा गठबंधन काम कर रहा है। टेंडर प्रक्रिया से लेकर फाइनल बिल पास होने तक हर स्तर पर कथित तौर पर मोटी रकम का लेन-देन हो रहा है। जब 16 से 22 फीसदी राशि सिर्फ ‘कमीशन और सेटिंग’ में चली जाएगी, तो ठेकेदार गुणवत्तापूर्ण काम कैसे करेगा ? वह अपनी जेब से तो पैसे लगाएगा नहीं, इसलिए निर्माण कार्यो में उसके द्वारा गुणवत्ता की अनदेखी की जाती हैं। शिकायत किए जाने के बावजूद, प्रशासन की यह रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। हाल ही में नगर पालिका के एक पार्षद ने 16 % कमीशन के मुद्दे को उठाकर ठेकेदारों से गुणवत्तापूर्ण निर्माण करने निवेदन करते हुए मुंगेली नगर पालिका को कमीशन मुक्त बनाने सोशल मीडिया में निवेदन किया गया था। हालांकि मुंगेली की जनता की माने तो नगर पालिका में कमीशन प्रथा बंद असम्भव सा हैं।
जनता में भारी आक्रोश, आंदोलन की सुगबुगाहट…
मुंगेली की जनता अब इस ‘डिजिटल विकास’ से ऊब चुकी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सोशल मीडिया की रील्स और पोस्ट से शहर का गंदा पानी साफ नहीं होगा और न ही गड्ढों से मुक्ति मिलेगी। यदि जल्द ही इन करोड़ों के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी की गई तो शहरवासी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। मुंगेली की जनता प्रश्न कर रही हैं कि क्या सोशल मीडिया के भ्रमजाल को तोड़कर जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर ‘सांठगांठ’ के इस खेल में मुंगेली का विकास ऐसे ही दम तोड़ता रहेगा ?



