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कोतवाली के सामने स्थित भगवान परशुराम की प्रतिमा पर पसरा अंधेरा…नगर पालिका की बेरुखी…समाज के जनप्रतिनिधियों ने भी मूंदी आंखें…नगर पालिका की लापरवाही से समाज में आक्रोश…

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स्वतंत्र तिवारी – 9752023023

​मुंगेली/ शहर के ह्रदय स्थल और सुरक्षा के सबसे बड़े केंद्र सिटी कोतवाली थाने के ठीक सामने स्थापित भगवान परशुराम की प्रतिमा इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और अंधकार का शिकार है। विडंबना देखिए कि जिस चौराहे से होकर दिन भर आला अधिकारी और नगर पालिका के जनप्रतिनिधि गुजरते हैं, वहीं महापुरुषों और आराध्य देवों की प्रतिमाएं रात के अंधेरे में गुम हो जाती हैं। नगर पालिका की इस घोर बेरुखी को लेकर अब आम नागरिकों और समाज के प्रबुद्ध जनों में गहरा रोष पनप रहा है। नागरिकों का कहना हैं कि नगर पालिका द्वारा​लाखों का प्रोजेक्ट बना तो देती हैं पर ‘रखरखाव’ में लापरवाही बरती जाती हैं, ​शहर के सौंदर्यीकरण और गौरव को बढ़ाने के नाम पर नगर पालिका हर साल लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाती है। शहर के प्रमुख चौराहों पर प्रतिमाएं तो स्थापित कर दी जाती हैं, लेकिन स्थापना के बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं हैं।
पुराना बस स्टैंड स्थित सिटी कोतवाली के सामने लगी भगवान परशुराम की प्रतिमा पर पसरा यह अंधेरा नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। रात होते ही यहाँ समुचित प्रकाश (लाइटिंग) की व्यवस्था न होने के कारण पूरी प्रतिमा अंधकार के आगोश में समा जाती है।

​समाज के ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों ने भी मूंदी आंखें…

​इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा निराशाजनक रवैया समाज के उन स्वघोषित ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों का रहा है, जो चुनाव या मंचों पर समाज और संस्कृति की बड़ी-बड़ी दुहाइयां देते हैं। प्रतिमा स्थापना के समय तो वाहवाही लूटने के लिए होड़ मची रहती है, लेकिन आज जब उस गरिमामयी स्थल की देखरेख और सम्मान की बात आई है, तो सभी जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने अपनी आंखें मूंद ली हैं। समाज के जुड़े किसी भी नेता ने अब तक इस अंधेरे को दूर करने के लिए नगर पालिका प्रशासन पर दबाव बनाने की जहमत नहीं उठाई है। जानकारी के मुताबिक परशुरामजी प्रतिमा के पास लगी सामान्य व सजावट वाली लाईट बंद हैं जिससे प्रतिमा के पास अंधेरा छाया हुआ हैं।

​आस्था और सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं…

​स्थानीय नागरिकों और ब्राम्हण समाज के लोगों का कहना हैं कि ​”यह सिर्फ एक लाइट बंद होने का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे आराध्य और महापुरुषों के प्रति नगर पालिका के लापरवाह रवैये का प्रमाण है। जब कोतवाली जैसी अति-संवेदनशील और व्यस्त जगह के सामने यह हाल है, तो बाकी जगहों व वार्डों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।”

दो हफ्ते से बंद हैं लाईट्स…

ब्राम्हण समाज के लोगों ने बताया कि करीब दो हफ्ते से भगवान परशुरामजी की प्रतिमा के पास लगी सभी लाईट्स बंद हैं इस मामले को करीब 10-12 दिन पहले उठाया भी गया था परंतु नगर पालिका और नगर पालिका के जनप्रतिनिधि कुम्भकर्णी निंद्रा में हैं।

खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका या जनप्रतिनिधियों की नींद खुलने की पूरी संभावना हैं।