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दिनांक 11/05/2026 को कलेक्टर कलेक्टर कार्यालय से डिप्टी कलेक्टर ने चौथी बार भेजा PWD EE को पत्र…
मुंगेली/ छत्तीसगढ़ में सुशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच मुंगेली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और अफसरों की तानाशाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ लोक निर्माण विभाग (PWD) के आगे जिले के मुखिया यानी कलेक्टर का आदेश भी बेअसर साबित हो रहा है। मामला एस.एन.जी. (SNG) कॉलेज में DMF मद से हुए निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार से जुड़ा है। इस भ्रष्टाचार को दबाने और दोषियों को बचाने के लिए PWD के अधिकारी किस कदर अड़े हुए हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कलेक्टर कार्यालय के एक-दो नहीं, बल्कि चार-चार पत्रों को PWD के कार्यपालन अभियंता (EE) ने ठेंगे पर रख दिया है।
क्या है पूरा मामला ?
मुंगेली के प्रतिष्ठित एस.एन.जी. कॉलेज में डीएमएफ (DMF) फंड से करीब 30 लाख रुपये से अधिक के निर्माण कार्य किया गया था, लेकिन इन कार्यो में जमकर भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया। घटिया निर्माण और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत जब कलेक्टर तक पहुँची, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए PWD के कार्यपालन अभियंता (EE) को पत्र लिखकर तत्काल जांच और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने आदेश जारी किया, कलेक्टर कार्यालय मुंगेली से लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता को डिप्टी और अपर कलेक्टर ने करीब 4 पत्र भेज एसएनजी कालेज में डीएमएफ मद की राशि के तहत हुए जीर्णोद्धार कार्य में हुए भारी भ्रष्टाचार की शिकायत पर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने कहा गया था, परंतु लोक निर्माण विभाग मुंगेली के अधिकारी इतने निष्क्रिय और तानाशाह हो गए हैं कि कलेक्टर के आदेश का भी उनके द्वारा पालन नहीं किया जा रहा।
कलेक्टर का पत्र बनाम EE की अकड़…
मुंगेली कलेक्टर कार्यालय ने इस मामले में एक के बाद एक 4 बार PWD के EE को कड़े शब्दों में पत्र जारी किया। लेकिन EE साहब की अकड़ तो देखिए जो कलेक्टर कार्यालय का पत्र सीधे PWD दफ्तर में गुम सा हो गया तभी तो मुंगेली कलेक्टर कार्यालय को तीन बार रिमांडर सहित 4 बार पत्र भेजना पड़ा उस के बाद भी PWD विभाग ने न तो कोई जांच किया, न रिपोर्ट सौंपी और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया।
भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण, ये कैसा सुशासन ?
यह स्थिति साफ तौर पर बयां करती है कि PWD विभाग के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। कलेक्टर के आदेश की इस तरह अवहेलना करना बिना किसी ऊँचे राजनीतिक या प्रशासनिक ‘वरदहस्त’ के संभव नहीं है ?
अधिकारियों की बेलगाम तानाशाही…
जब जिले का कलेक्टर कार्यालय (डिप्टी और अपर कलेक्टर) एक PWD के EE से जवाब नहीं मांग पा रहा है, तो आम जनता की सुनवाई कैसे होगी ?
तीखे सवाल…
आखिर PWD के EE के पास ऐसी कौन सी ‘पावर’ है, जो वो जिले के कलेक्टर के 4-4 पत्रों को ठेंगे पर रख रहे हैं ? डीएमएफ से SNG कॉलेज के जीर्णोद्धार व निर्माण कार्य में ऐसा कौन सा राज छुपा है, जिसे उजागर होने से बचाने के लिए PWD पूरी ताकत लगा रहा है? क्या मुंगेली कलेक्टर अपने कार्यालयीन आदेश की इस खुली तौहीन पर अब PWD के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई करेंगे ?





