रायपुर। टिकरापारा पुलिस स्टेशन क्षेत्र को नशाखोरी और अड्डेबाजी से मुक्त करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण और अनूठी पहल की गई है। टिकरापारा पुलिस ने स्थानीय युवाओं को जोड़कर एक विशेष टीम का गठन किया है, जिसने ‘खाकी पेट्रोलिंग’ (Khaki Petroling) के तहत ‘खाकी नशा मुक्त जन अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत, क्षेत्र के गली-मोहल्लों में खुलेआम नशा करने वालों और अराजकता फैलाने वाले तत्वों को सख्त हिदायत दी जा रही है, जिसके बाद वैधानिक कार्यवाही भी सुनिश्चित की जा रही है।
सामुदायिक साझेदारी पर जोर
यह पहल पुलिस और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह महसूस किया गया कि केवल पुलिस बल के माध्यम से नशे और अड्डेबाजी जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से खत्म करना संभव नहीं है। इसलिए, क्षेत्र के जागरूक और ऊर्जावान युवाओं को इस अभियान से जोड़ा गया। युवाओं की यह टीम पुलिस के साथ मिलकर शाम और रात के समय संवेदनशील इलाकों में गश्त (पेट्रोलिंग) कर रही है।
नशाखोरी और अड्डेबाजी पर लगाम
अभियान का मुख्य फोकस उन स्थानों पर है जहां अक्सर युवा खुलेआम बैठकर नशा करते हैं, जिससे मोहल्ले के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और महिलाओं तथा बुजुर्गों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
‘खाकी नशा मुक्त जन अभियान’ के तहत, पेट्रोलिंग दल सबसे पहले ऐसे तत्वों को चिन्हित करता है। पहली बार पकड़े जाने पर उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है और सख्त मौखिक चेतावनी दी जाती है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति बार-बार नशे की गतिविधियों या अड्डेबाजी में संलिप्त पाया जाता है, तो पुलिस उसके विरुद्ध एनडीपीएस (NDPS) एक्ट या अन्य संगत धाराओं के तहत कड़ी वैधानिक कार्यवाही कर रही है।
सकारात्मक प्रभाव और सराहना
पुलिस के इस प्रयास को स्थानीय निवासियों द्वारा हाथों-हाथ लिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्रेस क्लब के महासचिव आशीष मिश्रा ने इस पहल को युवाओं को सही दिशा में मोड़ने तथा क्षेत्र को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ‘नेक पहल’ बताया है। उनका कहना है कि पुलिस और स्थानीय युवाओं के संयुक्त प्रयास से अब खुले स्थानों पर नशा करने वाले तत्वों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ गिरफ्तारी करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। युवाओं को जिम्मेदारी सौंपने से वे खुद भी जागरूक होते हैं और अपने साथी सहयोगियों को गलत आदतों से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हैं। टिकरापारा पुलिस का यह मॉडल जल्द ही अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।”
यह अभियान न केवल क्षेत्र की कानून व्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास की एक नई कड़ी भी स्थापित कर रहा है।





