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एडीईओ भर्ती परीक्षा…योग्य अभ्यर्थियों से छल…फर्जी डिग्रियों के आधार पर दिया गया बोनस अंक….साक्ष्य सहित शिकायत…. डाॅ0 सी0वी0 रमन यूनिवर्सिटी, आईएसबीएम सहित अन्य विवि के फर्जी डिग्रियों की शिकायत और उच्च स्तरीय जांच की मांग….

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विवादित व शिक्षा तंत्र को दागदार करने वाले विश्वविद्यालयों से परहेज करे मुख्यमंत्री, मंत्री व प्रशासनिक अधिकारी….

रायपुर-बिलासपुर-मुंगेली/ छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुये सहायक विकास विस्तार अधिकारी (एडीईओ) भर्ती परीक्षा की जांच शुरू हो गई है। अभ्यर्थियों ने सहायक विकास विस्तार अधिकारी (एडीईओ) भर्ती परीक्षा में प्रदेश के प्राईवेट शैक्षणिक संस्थानों से गैर मान्यता प्राप्त माध्यम (प्राईवेट/दूरस्थ/स्वाध्यायी) से अर्जित की गई पीजीडीआरडी और एमएससीआरडी के डिग्री से प्राप्त 15 बोनस अंकों पर सवाल खड़ा किया गया हैं जिसकी शिकायत अभ्यर्थियों ने प्रदेश के राज्यपाल, छ0ग0 निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, उच्च शिक्षा विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से किया गया हैं।
आपको बता दें कि छ0ग0 पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा छ0ग0 व्यावसायिक शिक्षा मंडल के माध्यम से सहायक विकास विस्तार अधिकारी की नियुक्ति हेतु परीक्षा आयोजित किया गया था, जो 15 जून 2025 को हुआ था, इस परीक्षा के परिणाम सामने आते ही बवाल मचा हुआ हैं क्योंकि अभ्यर्थियों का कहना हैं कि विभाग ने इस भर्ती परीक्षा की प्रोविजनल मेरिट लिस्ट जारी कर किया है, यह लिस्ट विकास आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी की गई है। अभ्यर्थियों ने बताया कि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पीआरडी-सीजी-जीओवी-इन पर जाकर लिस्ट देखा जा सकता हैं। इसके तहत सहायक विकास विस्तार अधिकारी के 200 रिक्त पदों पर भर्ती की परीक्षा संपन्न हुई, परीक्षा के परिणाम के साथ अंतिम उत्तर कुंजी 14 अगस्त को जारी की गई थी। इसके बाद 21 अगस्त को प्राप्तांक सूची और ओएमआर आंसर शीट संबंधित विभाग को सौंपी गई। अब चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन शुरू होगा। उक्त परीक्षा की मॉडल आंसर कुंजी पर पहले से ही कई सवाल उठते रहे हैं। कई प्रश्नों को हटाया गया था, क्योंकि उनमें उत्तर या तो गलत थे या विकल्प विवादित थे। परंतु अब इस पर फर्जी डिग्री और अवैध बोनस अंकों का नया विवाद जुड़ गया है, जिससे अभ्यर्थियों द्वारा परीक्षा रद्द करने की मांग की जा रही है।

सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर हुई शिकायत

सहायक विकास विस्तार अधिकारी परीक्षा में संबंधित विषय में पी0जी0डी0आर0डी0 तथा एम0एस0सी0आर0डी0 जैसे पाठ्यक्रमों की डिग्री या डिप्लोमा धारकों को 15 बोनस अंक जोड़कर दस्तावेज सत्यापन हेतु सूची जारी किया गया जिसके बाद कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने फर्जी डिग्रियों के आधार पर ये बोनस अंक लिए हैं। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जानकारी लेकर सबूतों सहित शिकायत की है। ग्रामीण विकास विभाग, विकास आयुक्त कार्यालय ने उच्च शिक्षा विभाग से उन विश्वविद्यालयों की सूची मांगी गई जहां से इस विषय में डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित है। विभाग द्वारा विश्वविद्यालयों की सूची तो उपलब्ध करा दी गई परंतु उन विश्वविद्यायलयोें के नाम के सामने ग्रामीण विकास में स्नातकोत्तर उपाधि/स्नातकोत्तर पत्रोपाधि पाठ्यक्रम के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की गई, जिसके बाद विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा दिनांक 10/09/2025 को छ0ग0 निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सचिव को पत्र भेज निजी विश्वविद्यालयों की सूची में से यह स्पष्ट करने कहा गया कि कौन सा निजी विश्वविद्यालय उक्त पाठ्यक्रम में प्राईवेट मोड से डिग्री जारी करने के लिय अधिकृत हैं या नहीं ? और कौन कौन से निजी विश्वविद्यालय ग्रामीण विकास में स्नातकोत्तर उपाधि/स्नातकोत्तर पत्रोपाधि पाठ्यक्रम संचालित करने के लिये अधिकृत हैं उक्त संबंध में विश्वविद्यालयवार, वर्षवार पाठ्यक्रम का मोड (नियमित/स्वाध्यायी/दूरस्थ) की जानकारी यथाशीध्र मांगी गई ताकि नियुक्ति की प्रकिया पूर्ण की जा सके।

नियमों की अनदेखी का आरोप…..लिखित शिकायत में जंाच व कार्यवाही की मांग…..

अभ्यर्थियों ने राज्यपाल, छ0ग0 निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, उच्च शिक्षा विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से शिकायत किया हैं शिकायत में बताया है कि कई प्राइवेट और डिस्टेंस एजुकेशन यूनिवर्सिटी ने डिग्री जारी की है, जबकि उनके पास केवल रेगुलर मोड में पढ़ाई कराने की मान्यता थी। अभ्यर्थियों ने बताया कि यूजीसी नियमों के अनुसार, केवल इग्नू को डिस्टेंस मोड में डिग्री जारी करने की अनुमति है। इसी आधार पर डिग्री की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल विभाग को नजी और शासकीय विश्वविद्यालयों की सूची भेजी गई है, ताकि सत्यापन और जांच प्रक्रिया पूरी की जा सके।
अभ्यर्थियों ने प्रदेश के प्राइवेट शैक्षणिक संस्थानों से गैर मान्यता प्राप्त माध्यम (प्राइवेट/दूरस्थ/स्वाध्यायी) से अर्जित की गई पी0जी0डी0आर0डी0 तथा एम0एस0सी0आर0डी0 के विरुद्ध जांच एवं कार्यवाही की मांग किया हैं अभ्यर्थियों ने अपने लिखित शिकायत में बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा एडीईओ भर्ती परीक्षा 2025 में मूल प्राप्तांक के बाद पी0जी0डी0आर0डी0 तथा एम0एस0सी0आर0डी0 डिग्रीधारी अभ्यर्थी को 15 अंक बोनस दिया जा रहा है। प्राइवेट विश्वविद्यालय की वेबसाइट, पेपर में विज्ञापन, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वेबसाइट एवं निजी विश्वविद्यालय स्थापना अधिनियम के अनुसार उन्हें केवल रेगुलर मोड से ही डिग्री देने की मान्यता प्राप्त है। परंतु विभिन्न अभ्यर्थी द्वारा उन विश्वविद्यालय के नाम पर प्राइवेट मोड से डिग्री अर्जित की गई है जो कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार गैर-कानूनी है। राज्य के विभित्र क्षेत्रों में आईसेक्ट या कई और नाम के शिक्षण केंद्र (दुकान) खुले हुए हैं, जो विभिन्न विश्वविद्यालय मुख्यतः डाॅ0 सी0वी0 रमन विश्वविद्यालय कोटा, आईएसबीएएम विश्वविद्यालय गरियाबंद तथा भारती विश्वविद्यालय आदि के नाम पर प्राइवेट में डिग्री बांट रहे हैं। अभ्यर्थियों ने अपने लिखित शिकायत में आगे बताया कि आईएसबीएम विश्वविद्यालय गरियाबंद द्वारा उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी में बताया गया है कि उनके यहां पीजीडीआरडी का कोर्स संचालित है। लेकिन विश्वविद्यालय की वेबसाइट से प्राप्त विभिन्न वर्ष के रिजल्ट की पी.डी.एफ. जिसमें विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न कोर्स में नामांकित बच्चों के नाम, रोल नंबर एवं पास/फेल की जानकारी है। उसमें कहीं भी पीजीडीआरडी, एमएससीआरडी या उससे संबंधित छात्र का किसी भी मोड में प्राइवेट या रेगुलर का जिक्र नहीं है। जिससे उस विश्वविद्यालय की डिग्री से संबंधिता पर प्रश्न चिन्ह है, साथ ही उन छात्रों की डिग्री पर जो उसे विश्वविद्यालय के नाम पर पीजीडीआरडी/एमएससीआरडी किए हैं उन पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं। लिखित शिकायत की कंडिका दो में बताया गया कि विभिन्न प्राइवेट शैक्षणिक संस्थानों जैसे डाॅ0 सी0वी0 रमन विश्वविद्यालय कोटा, आईएसबीएएम विश्वविद्यालय गरियाबंद तथा भारती विश्वविद्यालय आदि के नाम पर बहुत से स्टडी सेंटर द्वारा पीजीडीआरडी/एमएससीआरडी की डिग्री जिसमें विशेष रूप से प्राइवेट मोड लिखा गया है जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वेबसाइट एवं उन विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार केवल गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय एवं डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय कोटा को ही रेगुलर कॉलेज अटेंडी मोड से पीजीडीआरडी/एमएससीआरडी की डिग्री केवल रेगुलर मोड में देने की मान्यता है। इस तरह प्रदेश में हजारों प्राइवेट माध्यम से पीजीडीआरडी/एमएससीआरडी डिग्रीधारी लोगों की संख्या एवं उनका एडीईओ भर्ती परीक्षा के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में शामिन होने की स्थिति में एक गंभीर एवं संताजनक स्थिति की ओर इंगित करता है। शिकायत की कंडिका तीन में बताया गया कि प्राइवेट विश्वविद्यालय के नाम पर बहुत से रेगुलर मोड की भी पीजीडीआरडी/एमएससीआरडी की फर्जी डिग्री अर्जित की गई है, इसलिए आयोग द्वारा वर्ष 2018 से वर्ष 2025 तक के सभी बच्चों का रिकॉर्ड जिन्होंने विभिन्न प्राइवेट विश्वविद्यालय से किया है का रिकॉर्ड मांग कर उनका सत्यापन डीजीलाॅकर या विधि द्वारा स्थापित कोई और नियम से करना सुनिश्चित करना चाहिए। अंतिम कंडिका में बताया गया कि पीजीडीआरडी/एमएससीआरडी की सभी डिग्री जो राज्य के प्राइवेट विश्वविद्यालय के नाम पर मौजूद है, उनकी वैधता का गहन सत्यापन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की मौजूदा गाइडलाइन के अनुरूप करके उनकी सत्यता का परीक्षण करना चाहिए तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय को उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से मार्गदर्शन देना चाहिए। अभ्यर्थियों ने मांग किया हैं कि प्राइवेट माध्यम से अर्जित की गई पीजीडीआरडी/एमएससीआरडी डिग्रियों की जांच कर उचित मार्गदर्शन दें जिससे कोई भी योग्य उम्मीदवार का अहित ना हो एवं राज्य के प्राइवेट विश्वविद्यालय में पारदर्शिता बढे़। अब देखना हैं कि पूरे मामले में राज्य शासन द्वारा क्या कार्यवाही की जा जाती हैं।

दो सदस्यीय जांच समिति हुई गठित

अभ्यर्थियों के बताये अनुसार एडीईओ की भर्ती परीक्षा में पीजीडीआरडी और एमएआरडी की डिग्री या डिप्लोमा वालों को 15 अंकों के बोनस अंक दिए गए हैं, जबकि अभ्यर्थियों ने आरटीआई से जानकारी लेकर साक्ष्यों के साथ बताया है कि किस तरह से कुछ उम्मीदवारों ने बोनस अंक पाने के लिए फर्जी डिग्री प्राप्त की है और विश्वविद्यालयों ने नियमों से विपरित जाकर डिग्रियां बांटीं, जिसके बाद अब इस पूरे मामले की जांच शुरू की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार छ0ग0 निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा दो सदस्यीय जांच टीम गठित किया गया हैं जो पीजीडीआरडी/एमएससीआरडी पाठ्यक्रम से संबंधित प्राप्त शिकायतों की जांच करेंगे। जांच टीम में प्रो0 डाॅ0 व्यास दुबे, सदस्य छ0ग0 निजी विवि विनियामक आयोग तथा प्रो0 तिलक सेनगुप्ता सेवानिवृत्त प्राध्यापक एवं पूर्व उपसंचालक उच्च शिक्षा संचालनालय के नाम शामिल हैे। हालांकि जांच टीम के लिये आयोग से दिनांक 16/09/2025 को अधिसूचना जारी हो गया था अभी तक जांच हुई है या नहीं इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई हैैं।

7 अक्टूबर से शुरू हैं दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया

छ0ग0 व्यावसायिक परीक्षा मंडल से प्राप्त प्राप्तांक के आधार पर विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी संयुक्त मेरिट/वरीयता सूची के अनुसार सहायक विकास विस्तार अधिकारी के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन दिनांक 07/10/2025 से 14/10/2025 तक होगा। हालांकि अभ्यर्थियों ने कहा हैं कि जब तक उनके शिकायतों की सही जांच व कार्यवाही नहीं होती तब तक दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया रोक देनी चाहिये।