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निकम्मेपन और लापरवाही की हद…शिक्षा के लिए दान में दी गई जमीन में चल रही दुकानदारी…खतरे में मासूमों की जान…जिला प्रशासन कुम्भकर्णी निंद्रा…पूर्व कलेक्टर का आश्वासन भी झूठा…पहली से पांचवीं की कक्षाएँ 3 कमरों में संचालित…

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सी-मार्ट के बाद अब मिलेट कैफे और धन्वंतरि मेडिकल भी हटाया जाये, जब तक रामानुज स्कूल को उसके हक की पूरी जमीन नहीं मिल जाती, लड़ाई जारी रहेगी – स्वतंत्र तिवारी

मुंगेली/ दानदाताओं की नगरी मुंगेली में शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी हैं कारण यहां स्कूल भवनों को लेकर बहुत ही गंभीर स्थिति बनी हुई हैं। हाल ही में मुंगेली जिले के जरहागांव विकासखंड के ग्राम पंचायत बरदुली स्थित शासकीय प्राथमिक शाला की जर्जर छत का प्लास्टर गिरने से दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, मीडिया में यह खबर प्रमुखता से आने पर कलेक्टर को स्कूल का निरीक्षण करना पड़ा और संबंधितों नोटिस जारी किया गया था।

पर यहां मुंगेली शहर में स्थित एक ऐसे शिक्षा के मंदिर की बात करेंगे जिसके लिए मुंगेली के एक दानदाता रामानुज देवांगन ने अपनी पूंजी लगा स्कूल के लिए जमीन और स्कूल भवन दान किया। मुंगेली की पहचान शुरू से ही दानदाताओं के रूप में रही है, यहां के अधिकांश स्कूल व कालेज एवं कई भवनों को यहाँ के दानदाताओं ने अपनी पूँजी लगाकर शहर एवं जनता के विकास व उनके उत्थान के लिये सदैव ही दान के रूप में कुछ न कुछ दिया है इस बात को स्थानीय लोगों के साथ-साथ मुंगेली से जुड़े लोग भी बहुत अच्छे से जानते है।
दानदाताओं के सबसे प्रथम क्रम में मुंगेली के ऐतिहासिक रहे रामानुज प्राथमिक शाला को ही देखा जाए तो पड़ाव चौक और नया बस स्टैंड के बीचों-बीच में स्थित था। कई दशकों पहले गरीब बच्चों के उचित पढ़ाई व शिक्षा के लिये मुंगेली के दानवीर रामानुज देवांगन के द्वारा एक प्राथमिक शाला भवन का निर्माण कराया गया, और इस स्कूल का नाम रामानुज देवांगन शासकीय प्राथमिक शाला रखा गया। यह स्कूल लगभग चार दशक सफलतापूर्वक संचालित होता रहा और यहाँ की काफी अच्छी शिक्षा व्यवस्था के कारण आज यहाँ से पढ़े छात्र डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, प्रोफेसर व कई प्रशासनिक पदों के साथ-साथ राजनीतिक पदों भी आसीन है और का नाम भी रोशन किये हैं।
आपको बता दे कि मुंगेली के दानवीर रामानुज देवांगन ने शिक्षा के उद्देश्य के लिये जिस विशाल भूमि और स्कूल भवन का दान किया था उसमें तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा सी-मार्ट, मिलेट कैफे और धन्वंतरि मेडिकल संचालित किया जा रहा था। कई दशकों पहले यहां रामानुज प्राथमिक शाला संचालित था, बाद में नगर पालिका ने दानदाता की सहमति लेकर जर्जर हो चुके रामानुज प्राथमिक शाला को तोड़कर काम्पलेक्स बनाने व उसके प्रथम तक पर रामानुज प्राथमिक शाला बनाकर रामानुज देवांगन के नाम से ही नामकरण करने की बात बकायदा पत्र व्यवहार के माध्यम से स्वीकारी थी, पर नगर पालिका ने काम्पलेक्स तो बना दिया पर प्रथम तल पर स्कूल नहीं बना सकी, लेकिन राज्य में कांग्रेस की भूपेश सरकार आई तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सी-मार्ट योजना की शुरुआत की, तब मुंगेली नगर पालिका व शासन प्रशासन की आंखों में दानदाता द्वारा शिक्षा के लिये दी गई जमीन चुभने लगा और आनन-फानन में इस रामानुज स्कूल के जमीन पर बने काम्पलेक्स का स्वरूप बदलकर इसे सी-मार्ट बना दिया गया था। बाद में यहाँ इसके ऊपर मिलेट कैफे और बगल में धन्वन्तरि मेडिकल खोल दिया गया।

मुंगेली अम्बेडकर वार्ड निवासी अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी ने सुशासन तिहार में आवेदन देते हुए शासन-प्रशासन से मांग किया था कि अम्बेडकर वार्ड क्रमांक 13 में गौरव पथ में स्थित सीमार्ट, मिलेट कैफे व धनवन्तरि मेडिकल एक बड़े काम्प्लेक्स में संचालित है, उक्त भूमि दानदाता रामानुज देवांगन ने शिक्षा के उद्देश्य के लिये दिया था, पूर्व में यहां रामानुज देवांगन स्कूल संचालित था, जिसे अन्यत्र जर्जर भवन में संचालित किया जा रहा है। शिक्षा के लिये दान में दी गई जमीन पर व्यवसाय संचालित हैं इसीलिये सी-मार्ट, मिलेट कैफे व धनवन्तरि मेडिकल को हटाकर पुनः वहां शिक्षा के उद्देश्य के लिये दिये गये दान की जमीन पर रामानुज स्कूल खोला जाये। स्वतंत्र तिवारी द्वारा पहले भी लिखित मांग की जा चुकी हैं, सुशासन तिहार में लगे स्वतंत्र तिवारी के इस आवेदन और मांग के बाद एसडीएम मुंगेली ने दिनांक 11/04/2025 को सी-मार्ट के संचालक को नोटिस जारी कर 7 दिवस के भीतर सीमार्ट खाली करने कहा, जिसके बाद सीमार्ट संचालक 10/06/2025 तक समय मांगा, काफी उठापटक के बाद दिनांक 16/07/2025 को सी-मार्ट के संचालक द्वारा अधिकारियों के समक्ष रामानुज स्कूल की प्रधानपाठक को सी-मार्ट खाली कर भवन आधिपत्य में सौंपते हुए चाबी दी गई। हालांकि अभी इस भवन में रामानुज स्कूल की कक्षाएं संचालित नहीं हो सकती क्योंकि पहले ये एक सुपर बाजार की तर्ज पर सी-मार्ट बना था, तो खिड़की-दरवाजे नहीं हैं, काँच से बना गेट बस हैं, जिसके बाद नगर पालिका के सीएमओ से उस भवन में स्कूल संचालन लायक व्यवस्था करने निवेदन किया गया तो सीएमओ ने जल्द स्टीमेट बनवा वहां जो भी काम हो जल्द ही पूर्ण कराने का आश्वासन दिया हैं, लेकिन इस सब में समय लग रहा हैं और वर्तमान में रामानुज देवांगन शासकीय प्राथमिक शाला का संचालन परमहंस द्वार के बगल में अत्यंत जर्जर भवन में संचालित हैं। इस जर्जर भवन की हालत देख आप समझ ही सकते हैं कि मासूम बच्चों के जान से किस कदर खेला जा रहा हैं, इसी जर्जर भवन में बाल विद्या मंदिर भी संचालित हैं लेकिन किसी अधिकारी, नेता या जनप्रतिनिधियों के हृदय में इन मासूम बच्चों के लिए करुणा नहीं जागी, वरना इस भवन की मरम्मत वर्षों पहले हो जाती।

पहली से पांचवीं की कक्षाएँ 3 कमरों में संचालित…

आपको बता दे कि रामानुज देवांगन शासकीय प्राथमिक शाला में कुछ बच्चों की संख्या 160 हैं, जिसमें पहली से लेकर पाँचवीं तक के कक्षाओं की संख्या शामिल हैं, सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात तो यह हैं कि पहली से पाँचवी तक के लिए पाँच कक्षाएँ होनी चाहिए पर ये पांच कक्षाएँ केवल तीन कमरों में संचालित हैं ऐसे में आप प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कैसे उम्मीद करेंगे ? पांच कक्षाओं का संचालन तीन कमरों में क्यों किया जा रहा उसका भी कारण आप स्कूल की छतों की हालत देख लगा लीजिए, ऐसे भयावह और खतरनाक जर्जर छतों वाले कक्षा में क्लास लगने से बच्चों की जान को खतरा हैं। वही इस जर्जर भवन के नीचे ही बाल विद्या मंदिर संचालित है जहाँ करीब 35 मासूम बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन इन मासुमों के जान की परवाह किसी को नहीं हैं।

कलेक्टर, अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नेता निकले धोखेबाज…निकम्मेपन और लापरवाही की हद…

स्कूल भवन की छतों का जो ख़ौफ़नाक मंजर दिख रहा हैं, ये 4-5 वर्षों से ऐसे ही हैं, दैनिक भारत भास्कर द्वारा लगातार इस मामले को प्रकाशित किया जा रहा है कुछ साल पहले जब इस जर्जर छतों की हालत को लेकर समाचार प्रकाशित किया गया था, सोशल मीडिया में भी वायरल किया गया था तब तत्कालीन कलेक्टर राहुल देव ने तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर नवीन भगत को तत्काल स्कूल भेज मरम्मत करवाने निर्देश दिया गया था, जिसके बाद तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर मौके में पहुंचकर शिकायतकर्ताओं को बुलाया गया, स्कूल का पूरा स्टॉफ भी था, वहां आश्वासन दिया गया कि कल से मरम्मत का काम चालू हो जायेगा पर इस बात को वर्षों हो गए, उसी तरह नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष द्वारा भी स्कूल मरम्मत का आश्वासन दिया गया था पर ये सभी स्कूल भवन मरम्मत कराने नाकामयाब रहे और बच्चों की सुरक्षा और उनकी जान की रक्षा के लिए इनकी ओर से कोई उपाय नहीं किया गया, जिससे बच्चे जान जोखिम में डाल पढ़ाई करने मजबूर हैं, स्कूल प्रबंधन भी कई बार उच्चाधिकारियों को स्कूल के जर्जर भवन की सूचना दे चुका हैं पर जिला प्रशासन कुम्भकर्णी निंद्रा में हैं। मुंगेलीवासियों का कहना हैं कि इतने जर्जर भवन में वर्षो से स्कूल का संचालन होना जिला प्रशासन और जिम्मेदारों के निकम्मेपन और लापरवाही को दर्शाता हैं जो बेहद शर्मनाक हैं।

बच्चों के खेलने के लिए नहीं हैं ग्राउंड…मिलेट कैफे को जल्द कराना चाहिए खाली….

शिक्षा के लिए दी गई दान की जमीन पर हुए प्रशासनिक कब्जे को लेकर जनता में भयंकर आक्रोश देखा गया, बड़ी मुश्किल से यहां संचालित सी-मार्ट हटाया गया और उसकी चाबी और अधिपत्य रामानुज देवांगन स्कूल को सौंप दिया गया, परंतु उस भवन में तकनीकी और भौतिक परिस्थितियों के चलते अभी स्कूल का संचालन नहीं किया जा सकता, नगर पालिका द्वारा जल्द ही इस भवन को स्कूल संचालन के लायक बनाने स्टीमेट तैयार की जा रही हैं, कितना समय लगेगा यह कहना मुश्किल हैं, वहीं दूसरी ओर जब इस भवन में रामानुज स्कूल का संचालन शुरू होगा तो बच्चों के खेलने के लिए ग्राउंड नहीं हैं, ऐसे में शहरवासियों और यहां के पूर्व छात्रों का कहना हैं कि इस स्कूल भवन के ऊपर मिलेट कैफे को हटाकर सुरक्षा व्यवस्था कर खेलने के लिए ग्राउंड तैयार किया जाना चाहिए। मुंगेली निवासी स्वतंत्र तिवारी ने मिलेट कैफे और धन्वंतरि मेडिकल हटाने की मांग कलेक्टर से की हैं। अब देखना हैं इस मामले में क्या कार्यवाही होती हैं ?