कागजों में बस हो रहा समस्याओं का निराकरण… सुशासन तिहार महज एक दिखावा – स्वतंत्र तिवारी
मुंगेली/ विष्णुदेव सरकार के सुशासन तिहार का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का निराकरण करना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन करना तथा विकास कार्यों में गति लाने के साथ ही आम जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करना था, पर लापरवाह और निष्क्रिय अधिकारियों ने सुशासन तिहार के मामले में विष्णुदेव सरकार को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया हैं।
मुंगेली निवासी अधिवक्ता स्वतंत्र तिवारी द्वारा सुशासन तिहार में आवेदन लगा मांग किया गया था कि शहर के बालानी चौक स्थित ट्रांसफार्मर में नीचे बॉक्स, वायर सब खुला हुआ हैं, जिसमें कभी भी बड़ी दुर्घटना होने की संभावना हैं, इसीलिये जल्द ही इस ट्रांसफार्मर के नीचे लगे बॉक्स, खुले तार को व्यवस्थित और सुरक्षित करने की मांग की गई थी।
उक्त मांग व समस्या को नगर पालिका द्वारा दिनांक 21/04/2025 को छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (बिजली विभाग) भेज दिया गया, जहां बिजली विभाग के सहायक यंत्री (जोन) द्वारा आवेदक स्वतंत्र तिवारी को दिनांक 28/04/2025 को पत्र भेज 30 दिनों का समय मांगा गया था, बिजली विभाग द्वारा प्रेषित पत्र में लिखा था कि “नगर पालिका मुंगेली क्षेत्रांतर्गत मुंगेली में बालानी चौक स्थित ट्रांसर्फामर मे आवश्यक सुरक्षा संबंधित कार्य करने का आवेदन किया गया। इस ट्रांसफार्मर के रिनोवेशन हेतु प्राक्कलन तैयार कर दिया गया है। उक्त कार्य को पूर्ण होने में लगभग 30 दिन का समय लगेगा।”
आपको बता दें कि आज दिनांक 29/05/2025 हैं, और 30 दिन पूरे भी हो गए, परंतु बिजली विभाग अभी तक कुम्भकर्णी निंद्रा में हैं, यानी यूं कहा जाए कि बिजली विभाग भी इतना लापरवाह है कि उसे जनता, राहगीरों, पशुओं की जान की चिंता नहीं हैं, (फ़ोटो देख खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता हैं) ऐसे में विष्णुदेव सरकार के सुशासन तिहार का क्या औचित्य ? भगवान न करें अगर यहां कोई दुर्घटना होती हैं तो उसका जवाबदार कौन होगा ? सुशासन तिहार को मजाक बनाने बिजली विभाग और जिम्मेदार अफसरों ने कोई कसर नहीं छोड़ा हैं।
जिला प्रशासन के वे जिम्मेदार प्रभारी, नोडल अधिकारी भी हैं जो सुशासन तिहार का जिम्मा उठाये हुए हैं, जब मांग लंबित हैं, प्रक्रियाधीन हैं तो ऑनलाइन निराकृत क्यों दिखा रहा ?
ये अपनी जिम्मेदारी, जवाबदेही से बचने संबंधित अधिकारियों की सोची समझी प्लानिंग हैं। ऐसा ही कई आवेदनों में हुआ हैं जिसका लगातार प्रकाशन होते रहेगा।
हालांकि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करने की जानकारी मिली हैं।





