हिंदू धर्म प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. इस व्रत का वर्णन शिवपुराण में मिलता है. यह दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने और कृपा पाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इस दिन लोग भोलनाथ की पूजा और व्रत का पालन करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की अराधना करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही सभी परेशानियां दूर होती हैं. वहीं विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं.
फाल्गुन प्रदोष व्रत तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 25 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन अगले दिन यानी 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर होगा. प्रदोष व्रत का पूजन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है. ऐसे में फाल्गुन मास का पहला प्रदोष व्रत 25 फरवरी को रखा जाएगा. यह व्रत मंगलवार के दिन रखा जाएगा, इसलिए यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा.
फाल्गुन प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के प्रदोष व्रत के दिन भोलेनाथ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 25 फरवरी को शाम 6 बजकर 18 मिनट से लेकर 8 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. ऐसे में भक्तों को शिवजी की पूजा के लिए कुल 2 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा.
प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व माना जाता है. प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. ये व्रत करने से जीवन में खुशहाली आती हैं. व्यक्ति के सभी कष्ट, पाप, रोग और दोष दूर होते हैं. प्रदोष व्रत करने से संतान, सुख-समृद्धि, सफलता और धन-धान्य प्राप्त होता है.
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