Netanyahu – DAINIK BHARAT BHASKAR https://dainikbharatbhaskar.com DAINIK BHARAT BHASKAR Fri, 26 Jun 2026 16:34:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 मिडिल ईस्ट में फिर जंग की आहट! नेतन्याहू के ऐलान पर ईरान की जंगी धमकी, लेबनान बॉर्डर पर बढ़ा तनाव https://dainikbharatbhaskar.com/?p=72651 Fri, 26 Jun 2026 16:34:00 +0000 https://eveningtimescg.com/rumblings-of-war-in-the-middle-east-again-iran-issues-a-war-threat-following-netanyahus-announcement-tensions-escalate-at-the-lebanon-border/ बेरूत

लेबनान दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व का एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण देश है. यहां इजरायल की सीमा से लगा दक्षिणी इलाका लंबे समय से तनाव का केंद्र रहा है. हिज्बुल्लाह ईरान समर्थित एक मजबूत संगठन है, यहां सक्रिय है. हाल के वर्षों में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच कई बार झड़पें हुई हैं। 

2026  में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. इजरायल ने साफ कहा है कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता, उसके सैनिक लेबनान के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटेंगे. वहीं ईरान का रुख है कि इजरायल को पहले पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. यह जिद दोनों तरफ से नई जंग की स्क्रिप्ट लिख रही है। 

विश्लेषकों के अनुसार, यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं है. यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, हथियार नियंत्रण और बड़े देशों की रणनीति से जुड़ा मुद्दा है. लेबनान की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है, लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और अगर नई जंग छिड़ी तो मानवीय संकट और बढ़ जाएगा। 

इजरायल का रुख: सुरक्षा पहले, हथियार छोड़ो
इजरायल बार-बार कह रहा है कि उसकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. हिज्बुल्लाह के पास हजारों रॉकेट और हथियार हैं जो इजरायल के शहरों को निशाना बना सकते हैं. इजरायली प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दक्षिणी लेबनान में एक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखना जरूरी है. अगर हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ता तो इजरायली सेना वहां बनी रहेगी। 

इजरायल का तर्क है कि पिछले समझौतों में हिज्बुल्लाह ने हथियार छोड़ने का वादा किया लेकिन पूरा नहीं किया. इसलिए अब वे भरोसा नहीं कर रहे. इजरायल के अनुसार, हिज्बुल्लाह का हथियार रखना न सिर्फ इजरायल के लिए खतरा है बल्कि लेबनान की संप्रभुता को भी कमजोर करता है. इजरायल ने कई बार हवाई हमले किए हैं ताकि हिज्बुल्लाह की क्षमता कम हो. लेकिन इससे तनाव और बढ़ा है. अगर हिज्बुल्लाह फिर से हमला करता है तो इजरायल बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर सकता है। 

हिज्बुल्लाह और लेबनान की स्थिति 
हिज्बुल्लाह खुद को लेबनान का रक्षक बताता है. उसके नेता कहते हैं कि इजरायल की मौजूदगी के खिलाफ वे हथियार नहीं छोड़ेंगे. हिज्बुल्लाह का मानना है कि इजरायल पहले लेबनान की जमीन छोड़े, तब बात हो सकती है. उन्होंने कुछ हथियार लेबनानी सेना को सौंपे लेकिन पूरी तरह से हथियार छोड़ने की बात नहीं मानी। 

लेबनान सरकार कमजोर है. देश में आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और विभिन्न गुटों के बीच मतभेद हैं. हिज्बुल्लाह लेबनान की राजनीति में भी मजबूत है. अगर इजरायल नहीं हटता तो हिज्बुल्लाह समर्थकों में गुस्सा बढ़ेगा और नई लड़ाई शुरू हो सकती है. लेबनानी सेना दक्षिण में तैनात है लेकिन हिज्बुल्लाह की ताकत के आगे उसकी भूमिका सीमित लगती है। 

ईरान का रणनीतिक खेल: इजरायल पहले हटे
ईरान हिज्बुल्लाह का मुख्य समर्थक है. वह हथियार, पैसा और प्रशिक्षण देता है. ईरान का कहना है कि इजरायल को लेबनान से पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल हमले जारी रखता है तो वह जवाब देगा. ईरान-इजरायल के बीच अप्रत्यक्ष युद्ध लंबे समय से चल रहा है। 

ईरान के लिए लेबनान सिर्फ एक मोर्चा है. वह पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है. अगर इजरायल लेबनान में बना रहा तो ईरान दूसरे मोर्चों पर भी दबाव डाल सकता है. हाल के बयानों में ईरान ने कहा कि कोई भी समझौता लेबनान को कवर करे. इससे अमेरिका और इजरायल के बीच भी तनाव बढ़ा है। 

नई जंग की संभावित स्क्रिप्ट: क्या हो सकता है?
विश्लेषक मानते हैं कि अगर बात नहीं बनी तो नई जंग की स्क्रिप्ट इस तरह हो सकती है. पहले छोटी-छोटी झड़पें बढ़ेंगी. हिज्बुल्लाह रॉकेट दागेगा, इजरायल हवाई हमले करेगा. इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में और अंदर घुस सकती है. ईरान हिज्बुल्लाह को और मदद भेजेगा या दूसरे इलाकों से दबाव डालेगा। 

इससे लेबनान में बड़े पैमाने पर तबाही होगी। हजारों लोग मारे जा सकते हैं, लाखों विस्थापित होंगे. बुनियादी ढांचा बर्बाद होगा. इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा क्योंकि सैनिकों की तैनाती महंगी है. अमेरिका, जो शांति चाहता है, बीच में फंस सकता है। 

संयुक्त राष्ट्र और अन्य देश सीजफायर की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दोनों पक्षों की जिद इसे मुश्किल बना रही है. अगर इजरायल हटने से इनकार करता रहा और हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ा तो युद्ध टलना मुश्किल होगा। 

लेबनान की जंग सिर्फ दो देशों की नहीं है. यह पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित करेगी. सऊदी अरब, तुर्की जैसे देश प्रभावित होंगे. तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा. मानवीय संकट गहराएगा. लेबनान में पहले से लाखों शरणार्थी हैं. नई जंग से भूख, बीमारी और बेघर होने की समस्या बढ़ेगी. बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे, अस्पताल नष्ट हो जाएंगे। 

क्या है समाधान?
समाधान मुश्किल लेकिन नामुमकिन नहीं. दोनों पक्षों को समझौता करना होगा. इजरायल को सुरक्षा गारंटी मिले और हिज्बुल्लाह हथियारों का कुछ हिस्सा लेबनानी सेना को सौंप दे. ईरान को भी आश्वासन चाहिए कि उसके हित सुरक्षित हैं. अमेरिका और अन्य शक्तियां मध्यस्थता कर सकती हैं. लेबनान की सरकार को मजबूत होना चाहिए ताकि वह अपने पूरे इलाके पर नियंत्रण रख सके. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आर्थिक मदद देकर लेबनान को स्थिर करना चाहिए। 

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अपनों के कत्ल का दाग कैसे छूटेगा? गाजा पर अमेरिका के नए प्लान से मुश्किल में बेंजामिन नेतन्याहू https://dainikbharatbhaskar.com/?p=192113 Sun, 17 Dec 2023 14:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/?p=192113 गाजा पट्टी.

इजरायली सेना आईडीएफ अपने ही लोगों के कत्ल करने के आरोप में चौतरफा आलोचना झेल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि IDF ने उन तीन नागरिकों पर तब गोली चलाई जब वे हवा में सफेद झंडे लहरा रहे थे। इस गोलीबारी के बाद आईडीएफ पर उन आरोपों को बल मिल रहा है कि गाजा में वह हमास आतंकी ही नहीं आम नागरिकों को भी निशाना बना रही है। हाल ही में हमास द्वारा संचालित गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया था कि शहर में मरने वालों की तादाद 20 हजार पार कर गई है। इसमें दो तिहाई महिलाएं और बच्चे हैं। पहले जहां अमेरिका इस युद्ध में इजरायल का समर्थन कर रहा था, उसने भी अपने हाथ खींचने की तैयारी कर ली है।

एनबीसी न्यूज ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि जो बाइडेन सरकार ने गाजा पर इजरायली हमले के लिए नया प्लान तैयार किया है। अमेरिका ने इजरायल से कहा है कि वो जितनी जल्दी हो सके गाजा पर अपनी जमीनी अभियान समाप्त कर ले। इस नए प्लान ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के लिए मुश्किल पैदा कर दी है। गाजा पट्टी में मच रहा कत्लेआम अब दुनिया भर के देशों के साथ अमेरिका को भी चिंता में डाल रहा है। जो बाइडेन सरकार को अपनी गिरती साख सता रही है। हाल ही में गाजा पट्टी पर अभियान के दौरान इजरायली सेना ने गलती से अपने ही लोगों को गोलियों से भून डाला। मीडिया रिपोर्ट्स आईडीएफ पर ऐसे आरोप लगा रही है कि इजरायल को मालूम नहीं था कि वो उसके ही नागरिक हैं, वह उन्हें फिलिस्तीन के आम नागरिक समझ रही थीं। इस कत्लेआम से इजरायल अब बैकफुट पर है। उसने मामले में हाई प्रोफाइल जांच के आदेश दिए हैं। उधर, इजरायली सेना की तरफ से बयान आया है कि वो घटना से गलती से हो गई। हमारे सैनिक पिछले काफी दिनों से कठिन परिस्थितियों में गुजर रहे हैं। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।

इजरायल के खेद प्रकट करने वाले बयान से यह मामला जल्द सुलझते हुए नहीं नजर आ रहा है। अब खबर है कि अमेरिका ने इजरायल को गाजा पर जमीनी अभियान समाप्त करने की बात कही है। अमेरिका के नए प्लान ने बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज कर दिया हैं। मामले से परिचित दो अमेरिकी अधिकारियों ने एनबीसी न्यूज को बताया कि बाइडेन प्रशासन ने इजरायली सरकार से कहा है कि वह चाहता है कि देश गाजा में अपने बड़े पैमाने पर जमीनी अभियान को समाप्त कर दे और हमास के खिलाफ अपने युद्ध पर ही फोकस करे।

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपनी बैठक के दौरान युद्ध के इस नए चरण के लिए चर्चा की। व्हाइट हाउस प्रेस वार्ता में, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि सुलिवन ने नेतन्याहू से "इजरायल के सैन्य अभियान के अगले चरण के बारे में बात की। अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से कहा गया है कि इजरायल ने अमेरिका के इस प्रस्ताव के बारे में सोचकर जवाब देने के लिए समय मांगा है।

गाजा पर संयम बरते इजरायली सेना
एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट है कि अमेरिकी अधिकारियों ने निजी तौर पर इजरायली अधिकारियों को संयम बरतने और बड़े पैमाने पर नागरिक हताहतों से बचने की चेतावनी दी है। इजरायली सेना का तर्क है कि उसने जमीनी हमले से पहले फिलिस्तीनियों को सुरक्षित जगह जाने के लिए पर्याप्त समय दिया था। लेकिन फिलिस्तीनियों ने कहा है कि उनके पास कहीं और जाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। गौरतलब है कि गाजा पट्टी में मरने वालों की संख्या 20,000 के करीब पहुंच गई है, जिनमें से दो-तिहाई महिलाएं और बच्चे हैं।

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